बृहस्पतिवार, 16 फरवरी 2012

कैसे करें ब्लॉग्गिंग ?

क्या आप उन लोगों में से हैं जो दिल खोल कर लिखना चाहते हैं, लेकिन अभी ब्लॉग्गिंग के बारे में ज्यादा जानते नहीं हैं. या फिर आप के पास एक काफी सुन्दर ब्लॉग है लेकिन उसे पढने वाला कोई नहीं, क्यों की आप "सर्च-इंजिन" की सफाई में अभी तक सफल नहीं हो पाए!! यदि आपका उत्तर है हाँ, तो यह लेख आप ही के लिए है.
ब्लॉग्गिंग इतना कठिन कार्य नहीं, जितना की आप समझ रहे हैं. बस कुछ साधारण सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है:

[१] आप के पास कुछ अच्छे लेख हो: ब्लॉग्गिंग के लिए सर्व प्रथम यह आवश्यक है की आप के पास कुछ अच्छा लिखने के लिए हो, जिसे पढ़ के आपके पाठकों को कोई लाभ मिले. मिसाल के तौर पर, जो लेख आप पढ़ रहे हैं, उससे आपको ब्लॉग्गिंग के बारे में कुछ जानकारी मिल रही है. इसी तरह आप की विशेषता के क्षेत्र में आप अवश्य ऐसा कुछ  लिख सकते हैं, जिससे की आप के पाठकों को कोई न कोई लाभ मिले. हाँ, कुछ विषयों पर लिखने के लिए इन्टरनेट पर पहले काफी अनुसन्धान करना पड़ता है, क्यूँ की जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं होती.

तकनिकी तौर पर देखा जय, तो ब्लॉग्गिंग के लिए सब से पहले एक ब्लॉग्गिंग प्लात्फोर्म की आवश्यकता होती है. आज कल ब्लॉगर और वर्डप्रेस जैसे काफी ब्लॉग्गिंग प्लात्फोर्म्स उपलब्ध हैं जो आप को अंग्रेजी के आलावा अन्य भाषाओँ में भी ब्लॉग्गिंग करने देती हैं. यह ब्लॉग मैंने ब्लॉगर प्लात्फोर्म पे बनाया है, जो की निशुल्क है.

[२]  मांग और पूर्ति की समझ रखें: हो सकता है की आपके लेख काफी अच्छे हों, लेकिन यदि उनके लिए सर्च-इंजिन द्वारा डिमांड (मांग) न हो, तो उसे कौन पढ़ेगा? मिसाल के तौर पर, फिलहाल हिंदी ब्लोग्स की मांग काफी अधिक है, क्यों की हिंदी में ज्यादा लोग ब्लॉग्गिंग नहीं करते - उसका प्रमाण यह है की गूगल जैसे किसी सर्च-इंजिन ने आपको यहाँ का मार्ग दिखाया!! कहने का तात्पर्य यह की ध्यान रखे कि जिस विषय पे आप लिख रहें हो, उसपर पहले से लेखों का भण्डार उपलब्ध न हो. यदि चाहें तो एक बार उस विषय पर गूगल-सर्च कर के परख लें.

[३] इन्टरनेट कि मुद्रा प्राप्त करते रहें: इन्टरनेट कि दुनिया में लिंक्स को मुद्रा कहते हैं. लिंक्स का मतलब है किसी और कि वेबसाइट पर आप के ब्लॉग का url (पता), जिसे क्लिक कर के कोई भी आप के ब्लॉग पर पहुँच सकता है. वह इसीलिए क्यों कि सर्च-इंजिन उन ब्लोग्स या वेबसाइटओं को ज्यादा महत्व देती है जिनके ज्यादातर लिंक्स दूसरी वेबसीतेस पर उपलब्ध हों.

[४] लिखना कभी न छोड़ें: जिस तरन एक नन्हे से पौधे को शुरू में आप के पालन और पोषण कि आवश्यकता होती है, उसी तरह ब्लॉग्गिंग में सफलता के लिए परिश्रम और धीरज कि आवश्यकता होती है. कोई भी ब्लॉग बनते ही प्रसिद्ध नहीं हो जाता, उसे समय लगता है. ऐसे में काफी आसान होता है लिखना बंद कर देना, लेकिन हर काम कि तरह, इसमें भी सफलता उसी को मिलती है जो प्रयत्नशील हो और परिणाम कि चिंता किये बिना निष्ठां से अपना कार्य करे.

[५] अपना ज्ञान औ विचार-शक्ति बढ़ाते रहें: जीवन के हर छोटे से छोटे कार्य और स्तिथि से कुछ न कुछ अवश्य सीखने को मिलता है. जितना ज्ञान बटोर सकते हो, उतना बटोरें. हमेशा सजक रह कर, समता भरे मन से विचार करें. इससे आप अपने मन में राग या द्वेष उत्पन्न करे बिना सहजता से और सच्चे ढंग से लिख पाएंगे.


सफलता आपके कदम चूमे.

शनिवार, 4 फरवरी 2012

हिंदी भाषा का नैतिक पतन

हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है. लेकिन आजादी मिलने के ६० साल बाद भी हम अपने जीवन में अंग्रेजी भाषा का ही  अधिक से अधिक उपयोग करते हैं. तकनीकी क्षेत्र में तो इसका प्रयोग इतना बढ़ चुका है की हमे "इ-मेल", "इन्टरनेट" और "ब्लॉग" जैसे कई शब्द अंग्रेजी शब्दकोश से चुराना पड़ा है. ये क्या हो गया है हमें? हमारी अपनी ही भाषा के प्रति इतनी नापसंदगी क्यों? या फिर हमे हिंदी में वार्ता लाभ करने में शर्म आती है ? ४०० साल के अंग्रेजी साशन का इतना तो प्रभाव पड़ा ही होगा हम पर.

लेकिन क्या हम इसे बदल नहीं सकते? या फिर यों कहे की बदलना ही होगा इसे, यदि हम अपनी वर्षों की संस्कृती और शैली को बचाके रखना चाहते हैं तो. वर्ना ज्यादा समय नहीं लगेगा इन्टरनेट जैस शब्दों के द्वारा हिंदी भाषा को बुरी तरह से दूषित होने में. हिंदी भाषा का अपने नैतिक और आदर्श रूप में बचाव आज हर तरुण भारतीय के सामने एक चुनौती और लक्ष्य है.
 
तो क्या करें हम अपनी राष्ट्रीय भाषा को दूषित होने से बचाने के लिए? यह कार्य इतना कठिन नहीं जितना की आप समझ रहे हैं. एक दक्षिण भारतीय परिवार में उभरने और अंग्रेजी माध्यम में पढने-लिखने के बावजूद मेरी हिंदी यदि इतनी अच्छी है की मै यह ब्लॉग लिख सकता हूँ , तो आपकी क्यों नहीं हो सकती? आप चाहे किसी भी क्षेत्र में काम करते हों, आप हिंदी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग कर के अपना राष्ट्रीय धर्मं निभा सकते हैं. फिर चाहे वो तकनीकी क्षेत्र हो या फिर अर्थ-शास्त्र, आप अपना लिखित और वाणी का संचार हिंदी में करें.

कहा जाता है की अभ्यास करने से ही निपुणता आती है. दिन भर के जो भी कार्य आप हिंदी के माध्यम से कर सकते हैं, वो आप हिंदी में ही करें. मिसाल के तौर पर, यदि आप आर्थिक ज्ञान के लिए CNBC-TV18 देखते हैं, तो उसकी जगह CNBC-आवाज़ देखना शुरू कर दें. जहाँ तक हो सके हिंदी ब्लॉग और वेब साईट से जानकारी लें. अब तो विकिपीडिया भी हिंदी में उपलब्ध हैं. हिंदी भाषा के कुछ बढ़िया वेबसाइट निम्न लिखित हैं:

http://en.wikipedia.org/wiki/Hindi_language  - विकिपीडिया जो की ज्ञान का भण्डार है!
http://navbharattimes.indiatimes.com - नवभारत टाइम्स, एक मशहूर हिंदी अखबार.

http://www.google.co.in/intl/hi/  -  Google search, हिंदी में.
http://hindi.economictimes.indiatimes.com - इकोनोमिक टाइम्स, एक अर्थ-शास्त्र का अखबार.